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टमाटर में कौन कौन सा बीमारी लगता है ?

टमाटर प्लांट्स को कई तरह की बीमारियों से प्रभावित हो सकती हैं। ये बीमारियाँ पेड़े़ जाने वाले कीटाणु, फंगल, वायरल, बैक्टीरियल और फिटोप्लाज्मा इत्यादि से हो सकती हैं। नीचे कुछ प्रमुख टमाटर बीमारियाँ दी गई हैं:

  1. बक्टेरियल विल्ट (Bacterial wilt): यह एक प्रमुख टमाटर बीमारी है जिसे रल्स्टोनिया सोलनासी (Ralstonia solanacearum) नामक बैक्टीरिया से होता है। यह बैक्टीरिया पेड़ की संरचना में प्रवेश करके पेड़ की अंगों की मरती है और पेड़ को संक्रमित करता है।
  2. फंगल दाग (Fungal leaf spot): यह बीमारी टमाटर के पत्तों पर दागों के रूप में प्रकट होती है। इसमें कई प्रकार के फंगस जैसे Alternaria, Septoria, और Cercospora शामिल हो सकते हैं।
  3. दाग-पत्ती विकार (Leaf mold): यह फंगल संक्रमण टमाटर के पत्तों पर होता है और पत्तियों के पीले या भूरे रंग के दागों के रूप में प्रकट होता है। प्रमुख कारक Botrytis sp. या Fulvia fulva हो सकते हैं।
  4. फूल शौचाल (Blossom end rot): यह एक कैल्शियम की कमी से होने वाली बीमारी ह

टमाटर में कई प्रकार के बैक्टीरियल रोग हो सकते हैं। यहाँ कुछ प्रमुख टमाटर की बैक्टीरियल बीमारियों का उल्लेख किया गया है:

  1. बैक्टीरियल विल्कसी रोग: यह रोग रल्स्टोनिया सोलानासी नामक बैक्टीरियम के कारण होता है। इसके परिणामस्वरूप पौधों पर पत्तों पर दाग बन जाते हैं, जो सफेद रंग के होते हैं। यह बीमारी पौधों की ग्रोथ को प्रभावित करती है और उत्पादन में कमी लाती है।
  2. बैक्टीरियल कैंकर: यह बीमारी कैंसरोबैक्टरियम लिनियर नामक बैक्टीरियम के कारण होती है। इसके परिणामस्वरूप टमाटर के पत्तों पर गांठेदार गांठें बन जाती हैं और पौधों की वृद्धि रुक जाती है।
  3. बैक्टीरियल स्पॉट: यह बीमारी बैक्टीरियम पेस्टोरियम नामक बैक्टीरियम के कारण होती है। इसके परिणामस्वरूप टमाटर के पत्तों पर छोटे भूरे या बैगनी दाग बन जाते हैं।
  4. बैक्टीरियल एन्रोलमेंट: यह बैक्टीरियम एनरोबक्टर के कारण होती ह

टमाटर पर निम्नलिखित प्रमुख फंगल दाग (Fungal leaf spot) बीमारियाँ हो सकती हैं:

  1. एल्टर्नारिया लीफ स्पॉट (Alternaria leaf spot): इस बीमारी का कारक फंगस एल्टर्नारिया सोलानी या एल्टर्नारिया आलटरनाता होता है। यह दाग पत्तियों पर छोटे-छोटे गहरे बौने रंग के दाग उत्पन्न करता है।
  2. सीप्टोरिया लीफ स्पॉट (Septoria leaf spot): इस बीमारी का कारक फंगस सीप्टोरिया लिकटिचोला होता है। इससे पत्तियों पर छोटे दाग उत्पन्न होते हैं जो गहरा भूरा या बैगनी रंग के होते हैं।
  3. एन्थ्राक्नोज लीफ स्पॉट (Anthracnose leaf spot): इस बीमारी का कारक फंगस कोलेटोट्रिकमा होता है। इससे पत्तियों पर गहरे बैगनी या भूरे रंग के दाग उत्पन्न होते हैं।
  4. फुसारियम विल्क (Fusarium wilt): यह बीमारी फंगस फ्यूसारियम ऑक्सिस्पोरम होता है और पौधों के संपूर्ण विकास को प्रभावित करता है। पत्तियों पर भूरे या बैगनी रंग के दाग उत्पन्न होते हैं।

टमाटर में कई प्रकार की वायरल बीमारियाँ हो सकती हैं। यहाँ कुछ प्रमुख टमाटर की वायरल बीमारियों का उल्लेख किया गया है:

  1. टोबाको मोसेइक वायरस (Tobacco mosaic virus): यह वायरस टमाटर के पत्तों पर विपरीत रंग के धागे उत्पन्न करता है और पत्तों को मुरझा देता है।
  2. टोमैटो स्पॉटेड वाइलस (Tomato spotted wilt virus): इस वायरस के प्रभाव से टमाटर के पत्तों पर गांठेदार दाग बनते हैं और पौधों की प्रवृत्ति प्रभावित होती है।
  3. क्यूकुम्बर मोसेइक वायरस (Cucumber mosaic virus): यह वायरस टमाटर पौधों को प्रभावित करता है और पत्तों पर अनियमित रंगीनता, धागे और दाग उत्पन्न करता है।
  4. टोमैटो यैलो लीफ कर्ल वायरस (Tomato yellow leaf curl virus): यह वायरस पत्तों की उत्पत्ति पर प्रभाव डालता है और पत्तों को मुड़वाने, सूखाने और पौधों की विकास पर असर डालता है।

ये सिर्फ कुछ प्रमुख वायरल बीमारियाँ हैं, जो टमाटर प्लांट्स को प्रभावित कर सकती हैं। वायरल बीमारियों का पता लगाने और उपचार करने के लिए स्थानी

टमाटर में फिटोप्लाज्मा बीमारी की व्याप्ति कम होने के बावजूद, कुछ प्रकार की फिटोप्लाज्मा बीमारियाँ हो सकती हैं। यहां कुछ प्रमुख टमाटर की फिटोप्लाज्मा बीमारियों का उल्लेख किया गया है:

  1. फिटोप्लाज्मा रोट (Phytoplasma rot): यह बीमारी फिटोप्लाज्मा जैनरिकुम संबंधी होती है और प्रमुख लक्षणों में पौधों की पत्तियों का पीला पड़ जाना और विकसित फलों में रसायन बढ़ना शामिल हो सकता है।
  2. टोमैटो यैलो वीन कर्ल फिटोप्लाज्मा (Tomato yellow vein curl phytoplasma): यह फिटोप्लाज्मा बीमारी टमाटर के पौधों पर प्रभाव डालती है और पत्तियों की वीनों पर पीले रंग की लकीरें उत्पन्न कर सकती है। यह पौधों के विकास को प्रभावित कर सकती है और उत्पादकता में कमी का कारण बन सकती है।
  3. टोमैटो स्टेरल क्लोरोसिस फिटोप्लाज्मा (Tomato stolbur phytoplasma): यह फिटोप्लाज्मा बीमारी पौधों को प्रभावित कर सकती है और पत्तियों के पीले रंग के दाग, सूखेपन, और पौधों के विकास में असमर्थता का कारण ब

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